GUILTY ( Netflix Movie )
निर्देशक: रूचि नारायण
पटकथा: कनिका ढिल्लन
कास्ट: कियारा आडवाणी, आकांशा रंजन कपूर, ताहिर शब्बीर, गुरफतेह सिंह, दलीप ताहिल
समीक्षा: हरपाल सिंह
मी टू मूव मूवमेंट पर आधारित यह फिल्म लगभग दो घंटे लंबी है ... जिसमें कहानी बस इतनी है ... कि एक कॉलेज की लड़की एक अमीर परिवार के लड़के पर आरोप लगाती है ... कि लड़के ने उसके साथ बलात्कार किया है ... लेकिन लड़का इसे स्वीकार नहीं करता है .... पूरी कहानी इस मुद्दे पर घूमती है कि बलात्कार हुआ या नहीं हुआ...
कहानी एक ऐसे कॉलेज को दिखाती है जहाँ लड़कियां खुलेआम लड़कों को गले लगाती हैं .... यहाँ तक कि एक लड़का कॉलेज की लड़की को अपनी गोद में उठाकर कक्षा में ले जा रहा है ... ड्रग्स ... सिगरेट ..सब खुलेआम इस्तेमाल किया जा रहा है…
कहानी की शुरुआत में, पटकथा लेखक ने सफलतापूर्वक दर्शकों के दिमागों को हैक करने की कोशिश की है ... जिस तरह से वह एक चरित्र को दर्शकों की आँखों में साबित करना चाहता था उसने साबित किया है ... जो लड़की खुलेआम नशे में है ... खुलेआम गंदे गाने गाती है ... और खुलेआम एक जवान लड़के से लिपट जाती है .... ऐसी लड़की के लिए उसे ज़बरदस्ती कोई छवि नहीं बनानी पड़ती ...उसने बस एक लड़की को यह सब करते स्क्रीन पर दिखाना था और दिखाया भी....और सब जानते हैं ऐसी लड़की के लिए कोई कैसी समझ बनाएगा....उसको किस नज़रिये से परखा जाएगा...और आप आसानी से समझ सकते हैं कि ऐसी लड़की अगर किसी लड़के पर रेप करने का इल्जाम लगाएगी तो लोगों का समाज का रिएक्शन क्या होगा....
लेकिन यहां सबसे बड़ी कमी यह है कि पात्रों को बहुत ही भ्रमित तरीके से प्रस्तुत किया गया है..... पात्रों की प्रस्तुति बहुत कमजोर है.. .... बेशक कियारा आडवाणी और आकांक्षा रंजन कपूर ने अपनी भूमिकाएँ बहुत अच्छी तरह से निभाई हैं….अनिष्क बेग और ताहिर शबीर ने भी एक खूबसूरत काम किया है… लेकिन कहानी का प्लॉट इतना मजेदार नहीं है… .कई बार मैंने इसे बीच में ही छोड़ने का फैसला किया… .लेकिन कहानी का फाईनल सीन फिर भी कुछ हद तक सन्तुष्ट कर के जाता है...
फिल्म धारा 375 एक ऐसे ही मामले पर आधारित है जहाँ एक मजबूत कोर्ट रूम ड्रामा था .... लेकिन मौजूदा फ़िल्म में इस सारे मसले को कोर्ट में ले जाने की बजाए दर्शकों की कचहरी में ले जाया गया है....
हालांकि यह एक मजबूत अंत नहीं था .... लेकिन यह उस बिंदु को दिखाने में सफल होता है जिस पर फिल्म आधारित है ...
फिल्म में कियारा का किरदार और कुछ एक्शन नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज 'सेक्स एजुकेशन' की नायिकाओं में से एक से प्रभावित लगते हैं ...
संवाद लेखकों को शायद यह निर्देश दिया जाता है कि वे नेटफ्लिक्स के लिए जब लिखें ...तब प्रत्येक संवाद में दो शब्द गाली गलौज के जरूर जोड़ें .... चाहे इसकी आवश्यकता हो या नहीं हो...
एक और बात जो सिख समुदाय को नाराज कर सकती है, वह यह है कि फिल्म की नायिका का नाम 'नानकी' है ....जो कि गुरु नानक साहब की बहन का नाम भी है....यही वजह है कि यह एक बात कई सारे लोगों को आपत्तिजनक लग सकती है ..ऐसा शायद जानबूझकर किया जाता है ताकि किसी फिल्म या शो को मुफ्त में कंट्रोवर्सी हासिल हो… और बिना पैसे खर्च किए प्रचार भी हासिल हो जाये...
मैं इस फिल्म को सिर्फ इसलिए देखने की सलाह दूंगा क्योंकि फिल्म निर्माता ने जिस बिंदु को दिखाने की कोशिश की है ... उसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता ...और फ़िल्म का फाईनल सीन वो सब कह जाता है जिसके लिए यह फ़िल्म रची गई...
फिल्म के अंत में एक संवाद लिखा गया है -
"जिन पर बलात्कार का आरोप लगाया गया ... उनमें से अधिकांश अपने स्वयं के मामलों में व्यस्त हैं और आराम से अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं ... और जिन लोगों ने अपने साथ हुए यौन शोषण के लिए आवाज़ उठाई है ... उनका जीवन और करियर खत्म हो गया..."
नाना पाटेकर और तनु श्री दत्ता का मामला सबके सामने है ... लोगों ने इस केस का फैसला इस आधार भर किया कि दोनों किस तरह की भूमिकाएं फिल्मों में निभाते हैं...उनके द्वारा निभाई गई फिल्मी भूमिका ही उनके किरदार को जानने के लिए लोगों का नज़रिया बन गयी...कितना हास्यपद है ना सब...पर यही होता है...लोग फिल्मों में हीरोइन के कपड़े और उसकी भूमिका को देखकर निर्णय लेते हैं कि उसके हक में बोलना है कि नही....
इस फिल्म में यह एक संयोग था या जानबूझकर कि ...एक लड़की का नाम में दत्ता आता है....और दूसरे के नाम में तनु...
इस फ़िल्म को एक मज़बूत फ़िल्म नहीं कहा जा सकता पर यह अपने संदेश के लिए देखी जा सकती है....पर फिर भी यह कहूंगा कि यह एक बेहतर फ़िल्म हो सकती थी....
रेटिंग - 2.5/5
harpal1980.singh@gmail.com

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